DELHI DESK: 13 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में दुर्गा प्रतिमा के विसर्जन के दौरान हिंसा हुई थी. हिंसा इतनी बढ़ गई थी कि मामला गोलीबारी तक पहुंच गया था. जिसमें 22 साल के गोपाल मिश्रा नाम के युवक की हत्या कर गई कर दी गई थी. पुलिस ने मामले में कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया. जिसमें कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया. हिंसा में हत्या का आरोपी सरफराज नेपाल भागने की फिराक में था. इसी दौरान पुलिस ने उसका एनकाउंटर कर दिया. बताया जा रहा है कि गोली आरोपी सरफराज के पैर में लगी है. चलिए आपको बताते हैं क्या होता है पुलिस एनकाउंटर का प्रोटोकॉल और कहां लगनी चाहिए एनकाउंटर में पुलिस की बंदूक से निकली पहली गोली.
दो तरह के होते हैं एनकाउंटर
भारत में पुलिस दो तरह से एनकाउंटर करती है. पहले जब कोई अपराधी पुलिस या सुरक्षा बलों की कस्टडी से फरार होने की कोशिश करता है. ऐसे में पुलिस उसे पकड़ने के लिए एनकाउंटर करती है. तो वहीं दूसरा तरीका जब पुलिस किसी अपराधी को गिरफ्तार करने जाती है. और ऐसे में अपराधी गिरफ्तारी से बचने के लिए भागता है और पुलिस पर हमला करता है. तो ऐसे में पुलिस से बचने के लिए और उसे पकड़ने के लिए जवाबी कार्रवाई करते हुए एनकाउंटर करती है.
पैर में मारनी होती है गोली
भारत के संविधान में एनकाउंटर का कहीं जिक्र नहीं है. लेकिन पुलिस और सुरक्षाबल इस शब्द का इस्तेमाल करते हैं. जब अपराधी और आतंकवादियों से उनका किसी कार्रवाई में सामना होता है. पुलिस की या सुरक्षा बलों की कस्टडी से कोई अपराधी भागने की कोशिश करता है. तो पहले पुलिस उसे चेतावनी देता है. लेकिन अपराधी फिर भी नहीं मानता और भागने की कोशिश करता है.
तो ऐसे में पुलिस और सुरक्षा बाल उसके पैर में गोली मारते हैं ताकि वह भाग ना सके. लेकिन अगर स्थिति काबू से बाहर चली जाती है. तो ऐसे में पुलिस का निशान पैर के अलावा शरीर का कोई भी हिस्सा हो सकता है और इस तरह के एनकाउंटर में अपराधी की मौत भी हो जाती है.
क्या है कानून की धारा?
कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीजर यानी सीआरपीसी की धारा 40 के तहत इस बात को सुनिश्चित किया गया है कि अगर कोई अपराधी गिरफ्तारी से बचने के लिए भागने की कोशिश करता है. या फिर पुलिस की कस्डटी से भागता है या पुलिस पर हमला करता है. तो ऐसी स्थिति में पुलिस के पास जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है.
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