Ticker

6/recent/ticker-posts

Header Ads Widget

तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है छुपा रहे हो - Ram Mandir aur Vipaksha

THN Network

- धर्मनिरपेक्ष धक्का, विपक्ष भौंचक्का


विकास वर्मा 


'तुम इतना जो मुस्कुरा रहे हो, क्या ग़म है जो छिपा रहे हो'...।' जी हां, विपक्ष और खासतौर पर कांग्रेसी कार्यकर्ताओं का इन दिनों देश भर में कुछ ऐसा ही हाल दिख रहा है। चेहरे पर बनावटी मुस्कुराहट और दिल में ग़म लिए घूम रहे हैं। 

कुछ महीनों पहले तक देश का मूड ऐसा दिख रहा था और कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों के लाखों कार्यकर्ताओं को भी यह लग रहा था कि I.N.D.I.A गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी-BJP को कड़ी टक्कर देगी। लेकिन देश का नब्ज पढ़ने में करीब- करीब फेल दिख रहे कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के शीर्ष नेतृत्व के एक फैसले से उसके लाखों कार्यकर्ता हलकान हैं। कार्यकर्ताओं का मानना है कि 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम के मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम का न्योता ठुकराकर उसके शीर्ष नेतृत्व ने ऐतिहासिक 'भूल' की है और इस एकमात्र फैसले से 2024 की बाजी पलटते हुए दिखाई दे रही है। खासतौर पर तब जबकि देश के मतदाता सिर्फ 50-60 दिनों बाद ही साल 2024 लोकसभा चुनाव के लिए वोट गिराएंगे। ऐसे में यह कैसे संभव होगा कि वह कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के शीर्ष नेतृत्व के इस ऐतिहासिक 'भूल' को भूल जाएंगे और महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के आधार पर वोट करेंगे?

दरअसल, चुनाव से ठीक पहले 22 जनवरी को अयोध्या में भगवान राम के मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2024 लोकसभा चुनाव के बरअक्स जो राजनीतिक और चुनावी बिसात बिछाई है उस बिसात पर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल इस तरीके से फंस गए हैं कि वह चुनाव खत्म होने तक इससे निकलते हुए दिख नहीं रहे हैं। बल्कि यूं कहें कि चुनावी बिसात पर विपक्ष फिलहाल चारों नाल चित्त दिखाई दे रहा है तो यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। BJP, RSS और उससे जुड़े दर्जनों अनुशांगिक संगठनों के साथ न्यूज़ चैनलों और मीडिया समेत और अन्य तमाम माध्यमों से PM मोदी ने राम के नाम पर देशभर में हिंदू और हिन्दूत्व का जो भावनात्मक माहौल खड़ा करने में कामयाबी हासिल की है, उस लहर को कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का शीर्ष नेतृत्व भले नहीं भांप पा रहा हो, मगर सड़कों पर संघर्ष करने वाले उसके लाखों कार्यकर्ताओं के होश फाख्ता हैं। कार्यकर्ताओं को लग रहा है कि अगर चुनाव तक देशभर में ऐसा ही 'राममय' माहौल बना रहा और ऐसा करने में मोदी-शाह और BJP-RSS से कोई चूक नहीं हुई तो विपक्षी दलों के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव कहीं ऐतिहासिक पराजय के मुहाने पर ना पहुंचा दे।

बहरहाल, देश के राजनीतिक और चुनावी इतिहास में संभवतः यह पहला मौका है जब कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियां अपने सबसे मजबूत राजनीतिक हथियार 'धर्मनिरपेक्षता' के मुद्दे पर ही घिर गई हैं। पूर्व के तमाम चुनावों में होता यह रहा कि धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे पर कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियां BJP को घेर लेती थी। कांग्रेस समेत सभी विपक्षी पार्टियां BJP को सांप्रदायिक पार्टी बताकर उसे एक तरह से राजनीतिक रूप से अछूत बना रखा था। 1998-99 में भी जब BJP के नेतृत्व में NDA बना था और उसके साथ जो राजनीतिक दल सकुचाते हुए और मजबूरीवश जुड़े भी थे तो वह इस शर्त पर ही जुड़े थे कि BJP और उसके नेता अयोध्या में राम मंदिर, धारा-370 और समान नागरिक संहिता जैसे सांप्रदायिक मुद्दों से खुद को दूर रखेगी और ऐसा ही हुआ भी तभी 1998 से 2004 तक केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में छह वर्षों तक सरकार चली। लेकिन 2024 आते-आते मोदी-शाह ने मिलकर बाज़ी पलट दी है। पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार ने  सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से अयोध्या में भगवान राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ कर-करवाकर ना सिर्फ भव्य राम मंदिर का निर्माण करवाने में सफलता प्राप्त की बल्कि अब मंदिर में मूर्ति के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम के बहाने जिस प्रकार से देशभर में हिन्दूत्व का माहौल खड़ा कर दिया है उसने धर्मनिरपेक्षता के मुद्दे को ही हाशिए पर लाकर रख दिया है। और जिस तरह से विपक्षी दलों ने इस कार्यक्रम से खुद को अलग रखा है... न्योते को ठुकराया है... वह देश के बहुसंख्यक हिन्दू आबादी को खटक रहा है। और 2024 में हालात ऐसे बन गए हैं कि उल्टा धर्मनिरपेक्ष दल ही राजनीतिक रूप से अछूत स्थिति में दिख रहे हैं। 

भावनाओं के ज्वार में बह रहे देश के आम हिन्दूओं को लग रहा है कि राम जो कि उसके अराध्य हैं... मर्यादा पुरुषोत्तम हैं... भगवान हैं... उनके जन्म स्थान पर भव्य राम मंदिर का निर्माण और अब उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इतिहास रच दिया है। जो काम कोई प्रधानमंत्री, नेता या राजनीतिक दल नहीं कर सके वह काम मोदी जी ने कर दिखाया है। वहीं कांग्रेस समेत अधिकांश विपक्षी दलों के बारे में यह सोच बन गई है कि ये पार्टियां हमेशा धर्मनिरपेक्षता और मुस्लिम वोट बैंक की तुष्टिकरण के नाम पर बहुसंख्यक हिन्दूओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाती रही है... अयोध्या में भगवान राम के जन्मस्थान को विवादित बनाए रखा... मंदिर निर्माण में अड़चन पैदा करते रहे... आदि-आदि और अब प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम का भी न्योता ठुकराकर हिन्दुओं का एक तरह से तिरस्कार किया है... आदि... आदि...।

Post a Comment

0 Comments