FOREIGN DESK: मरने के बाद इंसान जिंंदा होगा! चौंकिए मत, इसी उम्मीद में तमाम लोगों के शव बर्फ में लपेट कर रखे जा रहे हैं. भरोसा इतना ज्यादा है कि लोग लाखों रुपये खर्च करके मोर्चरी में जगह बुक करा रहे हैं, ताकि मरने के बाद उनके शव को लंबे वक्त तक सुरक्षित रखा जा सके. इस पूरी योजना को क्रायोनिक्स स्कीम (Cryonics Scheme) नाम दिया गया है. आप जानकर हैरान होंगे कि जिंदा रहते ही तमाम लोगों ने इसके लिए बुकिंंग करा ली है. कई और लोगों ने आवेदन किया है. आइए समझते हैं कि आखिर ये बला है क्या?
हाल ही में लंदन के 50 साल के एक शख्स की मौत हुई. उसे कैंसर था. उसकी इच्छा थी कि उसके शव को क्रायोनिक्स स्कीम के तहत सुरक्षित रखा जाए, ताकि एक दिन वो फिर जिंदा हो सके. उसकी इच्छा के अनुसार, क्रायोनिक्स इंस्टीट्यूट (Cryonics Institute) के एक्सपर्ट आए. उसके शव का अंतिम संस्कार करने की बजाय, सूखी बर्फ में पैक किया. बॉडी को परफ्यूज किया और शरीर में मौजूद ब्लड और पानी को प्रोसेस्ड करके क्रायो प्रोटेक्शन मिक्सर (Cryo Protection Mixture) में बदल दिया. इससे बॉडी बर्फ में रहने के बावजूद जमती नहीं है और बिल्कुल जिंदा इंसान की तरह सुरक्षित रहती है. फिर इसे एयरपोर्ट ले जाया गया और वहां से क्रायोनिक्स इंस्टीट्यूट की मोर्चरी में ले जाकर रख दिया गया.
कैसी है क्रायोनिक्स की मोर्चरी
क्रायोनिक्स की मोर्चरी में शवों को रखने के लिए बड़े-बड़े ब्लॉक्स बनाए गए हैं. इसमें लिक्विड नाइट्रोजन में बॉडी को –196 डिग्री सेल्सियस में जमाया जाता है. इस उम्मीद में कि भविष्य में कोई ऐसी तकनीक आ जाएगी, जिससे मरे हुए इंसान को जिंदा किया जा सकेगा. उस वक्त सबसे पहले इन लोगों को जिंदा किया जाएगा. इससे उन बीमारियों का भी इलाज करने में मदद मिलेगी, जिसकी वजह से इनकी मृत्यु हुई. जिन लोगों के शव अब तक इस मोर्चरी में रखे गए हैं, उनमें कई स्टूडेंट्स, शेफ, सेक्रेटरी और प्रोफेसर्स शामिल हैं. अब तक 250 से ज्यादा लोगों ने अपने शव यहां रखवाने के लिए बुकिंंग कराई है, इनमें सबसे ज्यादा अमेरिकी हैं. उसके बाद तमाम ब्रिटेन के लोग भी हैं. 50 से ज्यादा लोग तो वेटिंग में हैं. कई लोगों ने अपने पेट्स के लिए भी बुकिंंग कराई है.
1977 में एक महिला ने बुक करा ली थी जगह
सबसे पहले रिया एटिंगर नाम की एक मरीज ने 1977 में इसके लिए बुकिंग कराई थी. क्रायोनिक्स इंस्टीट्यूट के प्रेसिडेंट डेनिस कोवाल्सकी ने कहा, यह जुआ की तरह है. लेकिन चमत्कार कब हो जाए कहा नहीं जा सकता. यह कभी भी हो सकता है. दिलचस्प बात है कि लोगों में इसे लेकर काफी उत्सुकता है. तभी तो बहुत सारे लोग हमसे संपर्क कर रहे हैं. हालांकि, हम किसी की भी गारंटी नहीं लेते. आपको आपकी शर्त पर रखा जाता है. ऐसे सोचिए कि अगर दफना दिया जाए या अंतिम संस्कार कर दिया जाए तो जिंदा होने की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है, लेकिन हम कुछ तो बचाकर रख रहे हैं. हो सकता है कि एआई या स्टेम सेल रिसर्च की बदौलत हम इन लोगों को फिर जिंदा कर दें.
1085 साल की उम्र में जिंदा हो जाए तो…
क्रायोनिक्स के एक्सपर्ट इसमें उम्मीद तलाश रहे हैं, तो आलोचक भी कम नहीं. तमाम लोगों को लगता है कि यह बकवास बात है. ब्रेन डेड इंसानों को जिंदा करना असंभव है. हां, अगर उसका हार्ट या लिवर खराब है, तो जिंदा जिंदा करना आसान है. डॉक्टर डॉ मिरियम स्टॉपर्ड ने कहा-यह मृत शरीर की गरिमा के साथ खिलवाड़ है. लोगों को इससे बचना चाहिए. लेकिन क्रायोनिक्स के सबसे बड़े एक्सपर्ट एलन सिंक्लेयर जो अब 85 साल के हैं, कहते हैं कि अगर कोई 185 साल की उम्र में जिंदा हो या 1085 साल की उम्र में जिंदा हो जाए तो क्या गजब होगा…
0 Comments