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सुप्रीम कोर्ट ने किशोर लड़कियों पर 'दो मिनट के सुख' टिप्पणी पर हाई कोर्ट को फटकार लगाई, जानें पूरा मामला


THN Network

DELHI DESK: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया है जिसमें एक व्यक्ति को POCSO एक्ट के तहत बरी कर दिया गया था। शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट की उस टिप्पणी पर भी नाराजगी जताई जिसमें कहा गया था कि लड़कियों को अपनी यौन इच्छाओं पर काबू रखना चाहिए और 'दो मिनट के सुख' के लिए सब कुछ दांव पर नहीं लगाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट के सही इस्तेमाल और जजों के फैसले लिखने के तरीके पर व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को 'आपत्तिजनक' और 'अनावश्यक' बताते हुए उसे रद कर दिया और आरोपी को फिर से दोषी ठहराया है। मामले में आगे की सजा पर विशेषज्ञों की एक समिति फैसला लेगी।

दरअसल, कलकत्ता हाई कोर्ट ने 2023 में एक मामले में POCSO एक्ट के तहत एक व्यक्ति को दोषी ठहराए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया था। हाई कोर्ट ने कहा था कि आरोपी और पीड़िता के बीच संबंध सहमति से थे। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था, 'यौन इच्छाओं पर काबू रखें क्योंकि समाज की नजर में अगर वो दो मिनट के लिए यौन सुख के लिए तैयार हो जाती है तो हारती भी वही हैं।'

सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर को इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा था कि जजों को कानून और तथ्यों के आधार पर फैसला सुनाना चाहिए, न कि अदालती कार्यवाही में उपदेश देना चाहिए। जस्टिस अभय ओका और जस्टिस उज्जल भुयन की बेंच ने IPC और POCSO एक्ट के तहत दर्ज मामले में आरोपी को बरी करने के हाई कोर्ट के आदेश की वैधता पर भी सवाल उठाया। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की टिप्पणी को 'अस्वीकार्य', 'अप्रासंगिक', 'उपदेशात्मक' और 'अनुचित' बताया।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि उसने POCSO एक्ट के उचित इस्तेमाल और जजों को अपने फैसले कैसे लिखने चाहिए, इस पर व्यापक दिशानिर्देश जारी किए हैं।

















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