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अरबों खर्च कर क्यों चांद से 2KG मिट्टी लाया चीन?


THN Network

TECH DESK; चीन ने चंद्रमा के सुदूर हिस्से (वो हिस्सा जिस तरफ अंधेरा है) से मिट्टी लाकर इतिहास रच दिया है. ऐसा करने वाला वह पहला देश बन गया है. चीन के मून मिशन चैंग’ई-6 का री-एंट्री मॉड्यूल 25 जून को सुबह 11.30 बजे सैंपल लेकर चीन के उत्तरी हिस्से में लैंड हुआ. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन का मून मिशनल चंद्रमा की सतह से करीब 2 किलो मिट्टी लेकर वापस लौटा.

4 अरब साल पुरानी मिट्टी लाया चीन
चीन (China) जो सैंपल लाया है, वह करीब 4 अरब साल पुराना बताया जा रहा है. सैंपल इकट्ठा करने के लिए ड्रिल और रोबोटिक आर्म्स जैसी चीजों का इस्तेमाल किया गया. फिर सैंपल को एक कैप्सूल में डाला गया और री-एंट्री व्हीकल के जरिए धरती तक ट्रांसफर किया गया. चीन का मून मिशन चैंग’ई-6 3 मई को चंद्रमा के साउथ पोल पर लैंड हुआ था.

क्या है चांद का फार साइड?
चंद्रमा का सुदूर हिस्सा या फार साइड, वो इलाका है जो धरती से कभी नहीं दिखाई देता है. जब भी हम रात में चांद को देखने के लिए आसमान की तरफ देखते हैं, तो वह हर बार एक जैसा ही दिखाई देता है. भले ही हम चांद को कैसे भी या कहीं से देखें. चंद्रमा का वह हिस्सा जिसे धरती पर रहते हुए कभी नहीं देख पाते, उसे चांद का ‘फार साइड’ या डार्क साइड कहा जाता है.

चांद के ‘डार्क साइड’ में ऐसा क्या है?
अभी तक चंद्रमा पर जितने मून मिशन (Moon Mission)  भेजे गए हैं, ज्यादातर उस हिस्से में लैंड हुए हैं जो धरती से दिखता है. चांद के सुदूर हिस्से या फार साइड के बारे में बहुत ज्यादा जानकारी नहीं है. वैज्ञानिक अनुमान जताते रहे हैं कि चंद्रमा के इस हिस्से में बर्फ के रूप में पानी मौजूद है, जो वहां जीवन का सबसे बड़ा स्रोत हो सकता है. चीन लंबे समय से चंद्रमा पर अपना बेस बनाना चाहता है, इसी क्रम में उसने फार साइड से सैंपल इकट्ठा किया है.

मिट्टी से क्या हासिल करना चाहता है चीन?
चीन, फार साइड के सैंपल से यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि क्या वाकई उस हिस्से में बर्फ के रूप में पानी मौजूद है. चंद्रमा का निर्माण कैसे हुआ होगा, उसकी मिट्टी कैसी है और उसमें क्या-क्या चीजें हैं. रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन, चंद्रमा की मिट्टी का इस्तेमाल मून बेस प्रोजेक्ट के लिए करना चाहता है. यह महत्वाकांक्षी परियोजना इसी दशक के आखिर में शुरू होने की उम्मीद है.

कुछ दिन पहले ही करीब 100 चीनी वैज्ञानिक और शोधकर्ता वुहान में जुटे और चंद्रमा पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने पर चर्चा की. चाइनीस एकेडमी ऑफ़ इंजीनियरिंग के एक्सपर्ट डिंग लियून कहते हैं कि एक टीम खास रोबोट तैयार करने में जुट गई है. इस रोबोट का नाम ”चाइनीज सुपर मेशंस’ है. यह चंद्रमा की मिट्टी से ईंटें बनाएगी.

क्यों चांद पर बेस बनाने चाहते हैं चीन-अमेरिका
चंद्रमा पर अब तक जितने मिशन भेजे गए हैं, उससे तमाम जानकारी मिली हैं. मसलन- चंद्रमा की सतह पर सल्फर, ऑक्सीजन, एल्युमिनियम, कैल्शियम, आयरन, क्रोमियम और टाइटेनियम जैसी चीजों का पता लगा है. जो हर देश के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं. पर चंद्रमा पर सबसे पहले बेस बनाने की असली वजह ‘हीलियम-3’ है. साल 2022 में चीन का स्पेसक्राफ्ट चंद्रमा की सतह से मिट्टी लेकर लौटा तो पता लगा कि उसमें ‘हीलियम 3’ है, जो ऊर्जा का सबसे अहम स्रोत है. हीलियम 3 कितना ताकतवर है, इसको इस बात से समझ सकते हैं कि सिर्फ एक ग्राम हीलियम 3, 165 मेगावाट आवर्स की बिजली पैदा कर सकता है.

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