NEW DELHI: लोकसभा चुनाव 2024 से पहले सरकारी भर्तियों में पेपर लीक का मुद्दा चर्चा में है. कांग्रेस ने अपनी 5 गारंटी में से एक पेपर लीक पर सख्त कानून बनाने की बात कही है. पार्टी ने चुनाव में पेपर लीक से मुक्ति का नारा भी दिया है.
दूसरी तरफ राजस्थान में पेपर लीक कांड के आरोपियों पर सख्त कार्रवाई कर बीजेपी भी बढ़त लेने में जुटी है. हालांकि, यूपी और गुजरात में हुए हालिया पेपर लीक ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया है.
देश में पिछले 5 साल में 15 राज्यों की करीब 45 भर्ती परिक्षाओं का पेपर लीक हुआ है. इन पेपर लीक का सीधा असर 1.4 करोड़ उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है, जो सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे थे.
केंद्र और कई राज्यों में कानून बनने के बाद भी पेपर लीक की घटनाएं बदस्तूर जारी है. कई सरकारों ने पेपर लीक की वजह से होने वाली किरकिरी को देखते हुए भर्ती एग्जाम ही कराना बंद कर दिया है.
पेपर लीक कैसे बन गया देश का सबसे बड़ा मुद्दा?
2014 में पहली बार उत्तर प्रदेश में पेपर लीक की खबर सामने आई. तब यूपी में सीपीएमटी का पेपर लीक हुआ था. इस लीक में उस वक्त की अखिलेश यादव सरकार की खूब किरकिरी हुई. मामले में परीक्षा कराने वाली संस्था केजीएमयू पर भी सवाल उठे.
इसी साल जुलाई में लखनऊ में रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक हो गया. मामले की जांच यूपी एसटीएफ को सौंपी गई. इसके ठीक एक साल बाद बिहार में बोर्ड परीक्षा का पेपर लीक हो गया. उस वक्त बिहार में बीजेपी विपक्ष में थी और इसे बड़ा मुद्दा बनाया.
2017 में बिहार में एसएससी का पेपर लीक हुआ. इस मामले में एसएससी के चेयरमैन सुधीर कुमार गिरफ्तार हुए. धीरे-धीरे पेपर लीक देश की बड़ी समस्या बन गई.
इंडियन एक्सप्रेस ने हाल ही में पेपर लीक को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसके मुताबिक पिछले 5 साल में 41 पेपर लीक हुए. 2024 के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 45 के पास पहुंच जाती है.
सभी पेपर लीक सरकारी नौकरी से जुड़े हुए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक पेपर लीक का असर 1.4 करोड़ लोगों पर सीधे तौर हुआ. सभी सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी थे.
पिछले 5 साल में 15 राज्यों ने जो परीक्षा आयोजित करायी गई, उससे 1.4 लाख लोगों को नौकरी मिल सकती थी, लेकिन पेपर लीक की वजह से ये नौकरियां अभ्यर्थियों को नहीं मिल पाई.
राजस्थान और उत्तर प्रदेश में पेपर लीक सियासी मुद्दा भी बन गया. 2023 के चुनाव से पहले राजस्थान में एक रैली के दौरान खुद प्रधानमंत्री मोदी ने पेपर लीक वालों पर सख्त एक्शन लेने की बात कही थी.
पेपर लीक को लेकर झारखंड, राजस्थान सरकार ने विधानसभा में कानून भी पास कराए. हाल ही में केंद्र ने भी पेपर लीक पर कानून बनाया है.
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