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DELHI DESK: देश की राजधानी दिल्ली में बड़ा उलटफेर हुआ है. विधानसभा चुनावों से कुछ महीनों पहले दिल्ली को नया मुख्य सचिव मिला है. सीनियर आईएएस ऑफिसर और अरुणाचल के चीफ सेक्रेटरी धर्मेंद्र कुमार अब दिल्ली के नए मुख्य सचिव होंगे. वह नरेश कुमार की जगह लेंगे. नरेश कुमार का कार्यकाल काफी उथल-पुथल वाला रहा. उनके ही कार्यकाल में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया जेल भेजे गए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की स्थिति पर ऐतिहासिक फैसला भी नरेश कुमार के कार्यकाल के दौरान ही दिया. नरेश कुमार को LG वीके सक्सेना का करीबी माना जाता है. अब जबकि धर्मेंद्र कुमर को दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया गया है तो उनके पास 3 सबसे बड़ी चुनौतियां हैं, जिनसे निपटना कतई आसान नहीं होगा.
सीनियर IAS अधिकारी धर्मेंद्र कुमार 1 सितंबर से दिल्ली के मुख्य सचिव का कार्यभार संभालेंगे. इससे पहले वह NDMC के चेयरमैन और दिल्ली के पर्यावरण सचिव के तौर पर भी काम कर चुके हैं. उन्हें एक लो-प्रोफाइल अधिकारी के तौर पर भी जाना जाता है. धर्मेंद्र कुमार के सामने पहली सबसे बड़ी चुनौती केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच विश्वास बहाली करना होगा. साथ ही केजरीवाल सरकार और उपराज्यपाल वीके सक्सेन के बीच तल्ख रिश्ते को सुधारना भी बड़ा चैलेंज है. बता दें कि नरेश कुमार के कार्यकाल के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार के रिश्ते काफी बिगड़ गए. दिल्ली के कथित शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया तक को जेल की हवा खानी पड़ी. सीएम केजरीवाल तो अभी भी जेल में हैं.
दिल्ली विधानसभा चुनाव
धर्मेंद्र कुमार ऐसे समय में दिल्ली के मुख्य सचिव बनाए गए हैं, जब कुछ महीनों में ही दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं. विधानसभा चुनावों में धर्मेंद्र कुमार की भूमिका काफी महत्वपूर्ण हो जाएगी. बता दें कि जेल में बंद अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी ने प्रचंड बहुमत के साथ दिल्ली की सत्ता में वापसी की थी. दूसरी तरफ, बीजेपी लगातार देश की राजधानी में अपने पांव जमाने और सरकार बनाने की कोशिशों में जुटी है. लिहाजा, मुख्य सचिव धर्मेंद्र कुमार पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी.
प्रदूषण से निपटने के चुनौती
साल 1989 कैडर के आईएएस अधिकारी धर्मेंद्र कुमार को ऐसे समय में दिल्ली का मुख्य सचिव बनाया जा रहा है, जब कुछ ही महीनों में देश की राजधानी में सर्दी के मौसम का आगमन हो जाएगा. ठंड में दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति जानलेवा हो जाती है. कोर्ट से लेकर आम आदमी तक के निशाने पर सरकार आ जाती है. ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि दिल्ली के पूर्व पर्यावरण सचिव धर्मेंद्र कुमार प्रदूषण की स्थिति से किस तरह निपटते हैं.
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