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चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराध से कैसे निपट रहा है भारत?

THN Network


LAW DESK:
22 नवंबर को यूरोपीय संघ के सांसदों ने अल्फाबेट की GOOGle, मेटा और अन्य ऑनलाइन सेवाओं को चाइल्ड पोर्नोग्राफी यानी बाल अश्लीलता की पहचान कर उसे सोशल मीडिया से हटाने के लिए जरूरी नियमों का मसौदा तैयार करने पर सहमति व्यक्त की है.

सोशल मीडिया या इंटरनेट का गलत इस्तेमाल ने न सिर्फ यूरोपीय संघ की बल्कि लगभग पूरी दुनिया की चिंता बढ़ाई हुई है. सोशल मीडिया वो प्लैटफॉर्म हैं जहां आज के समय में रातों रात किसी को भी स्टार बनाया जा सकता है तो उतनी ही आसानी से किसी को गिराया भी जा सकता है.

रही बात चाइल्ड पोर्नोग्राफी की बात करें तो सोशल मीडिया के दुरुपयोग और चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे मामले ने भारत की चिंता बढ़ाई हुई है. भारत में हर साल हजारों बच्चे इसका शिकार बनते हैं. 
 
इंडिया चाइल्ड प्रोटेक्शन फंड की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में कोरोना वायरस के कारण साल 2020 और 2021 में लगे लॉकडाउन ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी के कंजप्शन को 95% तक बढ़ा दिया है.

इतना ही नहीं इसी रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में के दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों में चाइल्ड पोर्न नाम से इंटरनेट सर्च में बढ़ोतरी हुई थी. वहीं राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2020 में चाइल्ड पोर्नोग्राफी के 738 मामले थे जो वर्ष 2021 में बढ़कर 969 हो गए थे.


ऐसे में इस रिपोर्ट में जानते हैं कि भारत सरकार अपने देश में अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए क्या कर रहा है और हमारा देश चाइल्ड पोर्नोग्राफी जैसे जघन्य अपराध से कैसे निपटने के लिए क्या कर रहा है.

क्या होती है पोर्नोग्राफी

भारत में पोर्नोग्राफी के दायरे में ऐसी तस्वीरें, वीडियो या ऑडियो आती है, जो नग्नता पर आधारित हो. ऐसे वीडियो या ऑडियो को सोशल मीडिया पर अपलोड करने, किसी को भेजने या किसी और के जरिए अपलोड करवाने या भिजवाने पर पोर्नोग्राफी निरोधक कानून (Anti-pornography law) लागू होता है. 

क्या है चाइल्ड पोर्नोग्राफी, भारत में इसे लेकर क्या है कानून

किसी भी नाबालिग यानी बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार जुड़ा कोई भी वीडियो चाइल्ड पोर्नेग्राफी कहलाता है. भारत में चाइल्ड पोर्नोग्राफी को लेकर प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस (POCSO) एक्ट में सख्त सजा का प्रावधान है.

पॉक्सो एक्ट के धारा 14 में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी नाबालिग बच्चे या बच्चों को अश्लील कंटेंट के लिए इस्तेमाल करता है तो उसे उम्रकैद तक की सजा हो सकती है. साथ ही जुर्माना भी लगाया जा सकता है.

पॉक्सो एक्ट की धारा 15  के अनुसार कोई भी व्यक्ति अगर चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कोई भी कंटेंट अपने पास रखता है. ऐसी स्थिति में उसे तीन साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.

कितने सालों की सजा का प्रावधान है

इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 67 बी कहता है कि किसी भी व्यक्ति के मोबाइल फोन में चाइल्ड पोर्नोग्राफी से जुड़ा कोई भी वीडियो या फोटो मिलता है तो पहली बार पकड़े जाने पर उस व्यक्ति को 5 साल जेल और 10 लाख के जुर्माने होगा.

वहीं अगर दूसरी बार ऐसा ही कुछ करता पकड़ा जाता है तो उस व्यक्ति को 7 साल जेल और 10 लाख रुपये का जुर्माना चुकाना होगा.

पोर्नोग्राफी को लेकर भारत का क्या भी जान लीजिए 

भारत में भले अकेले में पोर्न देखने में किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, लेकिन अश्लील वीडियो या फोटो देखने, उस तस्वीर या वीडियो को डाउनलोड करने और उसे वायरल करना बड़ा अपराध माना जाता है.

किसी भी व्यक्ति की अश्लील तस्वीर रखने और उसे किसी भी सोशल प्लैटफॉर्म पर साझा करने पर इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट की धारा 67, 67A, 67B के तहत जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है.

इसके अलावा धारा 67 कहता है, अगर कोई व्यक्ति पोर्न कंटेंट को देखने, उस कंटेंट को डाउनलोड करने और वायरल करने पर पहली बार पकड़ा जाता है तो उसे  3 साल जेल की सजा होगा और 5 लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ेगा.

वहीं जब वही व्यक्ति दूसरी बार ऐसा करता पकड़ा जाता तो ऐसी स्थिति में उसे 5 साल की कैद और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है.

आईपीसी में भी है सजा का प्रावधान

इंडियन पीनल कोड (आईपीसी) में भी पोर्नोग्राफी या अश्लीलता को लेकर सजा का प्रावधान है. आईपीसी की धारा 292 और 293 में इसके लिए सजा का प्रावधान किया गया है.

धारा 292 कहता है कि, किसी भी अश्लील वस्तुओं को बेचना, साझा करना, इसे किसी और को दिखाना या प्रसारित करना अपराध है. ऐसा करते हुए अगर कोई व्यक्ति पहली बार पकड़ा जाता है तो उसे 2 साल तक की जेल और 2 हजार तक का जुर्माना लग सकता है. वहीं अगर दूसरी बार पकड़ा जाता है तो दोषी को 5 साल तक जेल और 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है.

वहीं आईपीसी की धारा 293 कहती है कि, 20 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति को अश्लील वस्तु दिखाना, बेचना, किराये पर देना या बांटना अपराध है. अगर कोई इसका दोषी पाया जाता है तो पहली बार में उसे  3 साल तक की जेल और 2 हजार रुपये की सजा का प्रावधान है. दूसरी बार एक बार फिर वही व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसे 7 साल तक की जेल और 5 हजार रुपये के जुर्माने की सजा हो सकती है.

अब समझते हैं चाइल्ड पोर्नोग्राफी का समाज पर क्या प्रभाव पड़ता है 

मनोवैज्ञानिक प्रभाव: पोर्न बच्चों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव डालता है. लगातार पोर्न देखने पर बच्चों में डिप्रेशन, चिड़चिड़ापन तथा चिंता की समस्या बढ़ती है. चाइल्ड पोर्नोग्राफी बच्चों के दैनिक कामकाज और सामाजिक संबंधों पर भी पड़ता है।

एक्सपर्ट की मानें तो पोर्न को नियमित रूप से देखा जाना यौन संतुष्टि और यौन उत्तेजना की भावना उत्पन्न करता है, जिससे वास्तविक जीवन में भी ऐसा ही कुछ करने की इच्छा होती है.

कुछ विशेषज्ञों की मानें तो लगातार पोर्न देखना एक नशा की तरह काम करता है. इसके अलावा पुरुष या किशोरों का ज्यादा पोर्न देखने से ऐसी संभावना बढ़ जाती है कि वह आम जिंदगी में भी महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट की तरह ही देखें.

भारत में पोर्नोग्राफी से निपटने में क्या चुनौतियां है

भारत में यौन संबंध को नकारात्मक रूप में देखा जाता है. हमारे देश में सेक्स बच्चों को यौन संबंध से जुड़ी कोई भी जानकारी में बाहर, अपने दोस्तें से ही या पोर्न वीडियो देखकर ही मिलती है. यही कारण है कि बच्चों को एक उम्र में पोर्नोग्राफी की लत लग जाती है.

इसके अलावा सरकार के सामने एक और समस्या ये है कि एजेंसियों के लिये चाइल्ड पोर्नोग्राफी की गतिविधियों का पता लगाना और उन पर प्रभावी ढंग से निगरानी रखना बहुत मुश्किल है. 

ऑनलाइन सबसे ज्यादा CSAM भारत से

2020 की एक रिपोर्ट के अनुसार, ऑनलाइन चाइल्ड सेक्शुअल अब्यूज मटेरियल (CSAM) सबसे ज्यादा भारत से पाया गया. इस ग्लोबल लिस्ट में, भारत पहले स्थान पर है टॉप चार देशों में से तीन दक्षिण एशिया से थे.

भारत - 11.7%
पाकिस्तान - 6.8%
बांग्लादेश - 3.3%


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